बीज जड़ित राखियों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश, कलेक्टर जयश्री जैन ने खरीदी इको-फ्रेंडली राखी

On: August 26, 2026 12:21 PM
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अशोक अग्रवाल, द्वारा
सकती, 25 अगस्त 2026।

रक्षाबंधन के पावन पर्व को पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण से जोड़ते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत ग्राम पंचायत पलाड़ी कला के राधा कृष्ण स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा आकर्षक एवं पर्यावरण हितैषी बीज जड़ित राखियां तैयार की जा रही हैं। इन राखियों के विक्रय के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में स्टॉल लगाया गया, जहां इको-फ्रेंडली राखियों की खरीदारी को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।

कलेक्ट्रेट परिसर में लगाए गए स्टॉल का नवपदस्थ कलेक्टर श्रीमती जयश्री जैन सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों, अधिकारी-कर्मचारियों और आम नागरिकों ने अवलोकन किया। कलेक्टर श्रीमती जयश्री जैन ने बीज जड़ित इको-फ्रेंडली राखी खरीदकर बिहान समूह की दीदियों का उत्साहवर्धन किया और उनकी इस अभिनव पहल की सराहना की।

राखी में छिपे हैं सब्जियों और फसलों के बीज

स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि इन राखियों को विभिन्न प्रकार के बीजों और प्राकृतिक रेशों से हस्तनिर्मित तरीके से तैयार किया गया है। इनमें धनिया, कद्दू, करेला, भिंडी, धान, मूंग, भुट्टा, मूंगदाल, राजमा, खीरा, अरहर, पालक भाजी, लाल भाजी सहित अन्य सब्जियों एवं फसलों के बीज शामिल किए गए हैं।

इन राखियों की सबसे खास बात यह है कि रक्षाबंधन के बाद इन्हें कचरे में फेंकने के बजाय मिट्टी में रोपा जा सकता है। राखी में मौजूद बीजों से पौधे उगाए जा सकते हैं। इस तरह रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम और स्नेह के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और किचन गार्डन को बढ़ावा देने का माध्यम भी बन रहा है।

महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संगम

कलेक्टर श्रीमती जयश्री जैन ने बिहान समूह की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इको-फ्रेंडली राखियों का निर्माण नारी सशक्तिकरण, स्वरोजगार और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संगम है। ऐसी अभिनव पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ ही आम लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विभिन्न शहरों में भी हो रहा राखियों का विक्रय

राधा कृष्ण स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार इन इको-फ्रेंडली राखियों की मांग को देखते हुए कोरबा, जांजगीर, बिलासपुर सहित विभिन्न स्थानों के कलेक्ट्रेट कार्यालय परिसरों में स्टॉल लगाकर राखियों का विक्रय किया जा रहा है। इसके अलावा ऑर्डर के माध्यम से भी राखियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस पहल से राखी त्योहार के सीजन में समूह की महिलाओं को अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है। साथ ही स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे हस्तनिर्मित उत्पादों को बाजार भी उपलब्ध हो रहा है। बीज जड़ित राखियों की यह पहल परंपरा, स्वरोजगार और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने का प्रेरक उदाहरण बन रही है।

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